गीत नवगीत कविता डायरी

13 January, 2016

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आपका स्वागत है !

07 January, 2016

बूँद-बूँद गंगाजल -डॉ.भावना तिवारी


�अब तक मेरे गीतों को आपने 'कवि-सम्मेलनों' में  दिल से सुना, सराहा, और भरपूर प्यार दिया,
उसके लिए आपकी बहुत-बहुत आभारी हूँ । अब मेरा# गीत-संग्रह ..#"बूँद-बूँद गंगाजल"..#'
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#डॉ.भावना तिवारी /
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#बूँद -बूँद#गंगाजल# भावना#तिवारी

20 October, 2015

हे कलम ,पराजित मत होना !



शूल  मिलें पग -पग पथ में
रोड़े अगिन मनोरथ में
विचलित हो ,विद्रोहों से
हे कलम पारजित,
मत होना !!

यह युद्ध भयानक अब होगा
जो नहीं हुआ वो सब होगा !
निर्णय शक्ति पराक्रम का
यदि अभी नहीं तो ,कब होगा !

अपने भी आलोचक हैं
विद्वेषक आखेटक हैं
व्याकुल है भीतर की पीड़ा
हे कलम, धैर्य को
मत खोना !!!

14 October, 2015

चलो बस यूँ ही

ये पद्मश्री
ये प्रशस्तियाँ
ये अकादमी
ये हस्तियाँ
ये बड़े-बड़े नाम
और उनके काम
नहीं जानती मैं
मैं मेरी बस्ती की
बस एक सखी को जानती हूँ
अभी कुछ दिन पहले ही तो
ईद की दी थीं उसने बधाईयाँ
मैंने खिलाईं थीं ख़ास मेवे वाली सिवइयाँ !!
सुनो महानुभावो
बड़ी चर्चा है आजकल तुम्हारी
सुना है बड़े फ़िक्रमंद हो तुम
पर सुनो ,कान खोलकर सुनो
दीवाली आने वाली है
ख़ुदा होने का दंभ भरने वालों
वातानुकूलित कक्षों में बैठकर
जनमानस का दर्द लिखने वालों
अपने भीतर भी इक़ दिया जलाना
मैं तुम्हें खिलाऊँगी मिठाइयाँ
भूल जाओगे फ़िर पुरस्कारों की रेवड़ियाँ
करूँगी जयगान तुम्हारा
फ़िर हृदयों पर लिखे जाएँगे
तुम्हारे यश -अभिलेख
जिन्हें तुम चाहकर भी
लौटाने की हिमाक़त न कर सकोगे !!
      भावना तिवारी


08 May, 2015

कौन भला निर्दोष यहाँ


दो दिनों में ही सब राजा हरिश्चन्द्र के वशंज चीख़ –चीख़कर न्याय का घंटा बजा रहे हैं .....मीडिया ने भी..हद कर दी ....ऐसा शोर मचाया कि जैसे इसके अतिरिक्त न तो देश में कोई समस्या है ..न कोई अन्य दोषी ..न अपराधी....वे जो गुंडों को प्रश्रय देते है...उनको कोई खोज ख़बर है क्या भूकंप पीछे छूट गया...किसानों की आत्महत्याएँ पीछे छूट गईं ....मासूम बच्चियों को हैवानियत का शिकार बनाने वालों का हृदय परिवर्तन हो गया ....कोई अन्य ख़बर नहीं ....अरे कोई बताओ ..रामराज  आ गया क्या...और एक ही रावण है ...कुकर्मी ...उसको शूली पर चढ़ा देना चाहिए ...निरपराध कोई है क्या ....स्वयं में झाँकने का समय ही कहाँ हैं ...बाहर –बाहर की ही यात्रा इतनी लम्बी है कि अपने भीतर की छोटी सी यात्रा कौन करे....हम अपना काम सही से करें....न करें .....पर हम अन्य लोगों के कर्तव्य गिनाने से कभी नहीं चूकते ....हम इस कार्य में पूर्ण –रूपेण परिपक्व और दक्ष हैं ....इसमें कहीं कोई कमी नहीं ....पीछे पड़ जाएँ जिसके तो न्याय करवाकर, गंगा नहाकर ही दम लेते हैं !
एक बार ..केवल एक बार ..क्या विचार नहीं करना चाहिए कि -क्या हम अपराधी नहीं ....हम पापी नहीं ...हम सौ प्रतिशत सच्चे और खरे सोना हैं ..क्या हमने अपना दोष छिपाने हेतु कभी किसी अन्य पर दोषारोपण  नहीं किया....क्या हम सत्य के चरम पर हैं ...

यहाँ दोषी केवल वही है जिसका दोष प्रकट हो जाए...जो TRP का द्योतक बन जाए ..जिसपर कहानियाँ लिखी जा सकें...हम सब धर्मराज युधिष्ठिर हो गए हैं क्या !!