गीत नवगीत कविता डायरी

20 October, 2015

हे कलम ,पराजित मत होना !



शूल  मिलें पग -पग पथ में
रोड़े अगिन मनोरथ में
विचलित हो ,विद्रोहों से
हे कलम पारजित,
मत होना !!

यह युद्ध भयानक अब होगा
जो नहीं हुआ वो सब होगा !
निर्णय शक्ति पराक्रम का
यदि अभी नहीं तो ,कब होगा !

अपने भी आलोचक हैं
विद्वेषक आखेटक हैं
व्याकुल है भीतर की पीड़ा
हे कलम, धैर्य को
मत खोना !!!