गीत नवगीत कविता डायरी

13 January, 2013

कठिन समय में योग्य-मनुज 
हर दुख,बिसार गाते हैं !
एकलव्य से शिष्य गुरु का 
ऋण,उतार जाते हैं   !!
अटल साधना ध्रुव जैसी 
नभ तक ,प्रसार पाती है ,
अथक लगन के सम्मुख पथ के,
शूल हार जाते हैं ..!!