गीत नवगीत कविता डायरी

13 January, 2013

कठिन समय में योग्य-मनुज 
हर दुख,बिसार गाते हैं !
एकलव्य से शिष्य गुरु का 
ऋण,उतार जाते हैं   !!
अटल साधना ध्रुव जैसी 
नभ तक ,प्रसार पाती है ,
अथक लगन के सम्मुख पथ के,
शूल हार जाते हैं ..!!

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर और प्रेरक रचना..लोहड़ी और मकर संक्रांति की शुभकामनायें!

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  2. आदरणीय सराहना हेतु आपका आभार ...
    आपको भी हार्दिक मंगल कामनाएँ ..
    आशीर्वाद बनाए रखें ......!!

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  3. सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    मकरसंक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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