गीत नवगीत कविता डायरी

15 June, 2011

सोच बहुत ऊंची है ..
पंख अभी नाजुक हैं..
आसमान बहुत ऊंचा .
सोचना है कि कैसे छूना है
उड़ान अभी बहुत लम्बी है !!