गीत नवगीत कविता डायरी
15 June, 2011
10 June, 2010
जीवन छोटा लम्बी राहें
मोम हृदय, जलने को आतुर,
प्राण तडपती पीड़ा बाँटें
समय किसे अंतस में झांके !!
शहर भागता- दौड़ा जाये ,
क्या पकड़ा, क्या छोड़ा जाये !
पिंजरे की सांकल ना खुलती
द्वार न तम का तोडा जाये !
अंतहीन चिर मेरा चलना,
जीवन छोटा लम्बी राहें !!
आदि अंत का छोर न जानूँ ,
आदि अंत का छोर न जानूँ ,
तू मुझमें ,बस इतना मानूँ !
सात युगों से प्रण है मिटकर ,
एक बार प्रिय तुमको पालूँ !
सप्त-तलों की गहराई है ,
अधर सिन्धु-तट पर भी प्यासे !!
मुक्तक
दर्द सहती रही जाने किसके लिए ,
आँख रोती रही जाने किसके लिए !
इस जमाने को मेरी जरूरत नहीं ;
सांस चलती रही जाने किसके लिए !!
~भावना~
02 January, 2010
Happy New Year 2010
निसंदेह,अध्याय दर्द का,बहुत बड़ा है !
पन्ने विरहातप के कितने ज्ञात नहीं !
जिल्द चढ़ाये रक्खी मैने सदा हास की!
आज आवरण हटा बंधुवर अनायास ही !!
तुमने झांक लिया मन,अंतर-तम मेरा ,
एक व्यथामय महाकाव्य है जीवन मेरा !!
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