गीत नवगीत कविता डायरी

15 June, 2011

गीत

उनके दिल के दरवाजे अब
मेरी खातिर नहीं खुलेंगे/
मेरे बहुत चाहने पर भी,
हँसकरके वो नहीं मिलेंगे//

हंसी खेल की बात ज़रा सी,
रूप विकट लेगी झगड़े का/
हल न सवालों का निकलेगा,
मुश्किल में,सम्बन्ध पड़ेगा/
बहुत चाहने पर भी आँसू,
इन हांथों से नहीं पुछेंगे//

एक भूल का इतना सारा,
दंड मिलेगा कब सोचा था?
सागर-नदिया साथ चलेंगे,
लेकिन उनका मेल न होगा/
बहुत चाहने पर भी नगमे
इन होठों की नहीं सुनेंगे/


सोच बहुत ऊंची है ..
पंख अभी नाजुक हैं..
आसमान बहुत ऊंचा .
सोचना है कि कैसे छूना है
उड़ान अभी बहुत लम्बी है !!
शब्द पुराने हैं ...बात पुरानी है ..पल पल गुज़रा कैसे ..यह एक कहानी है .!!

10 June, 2010

जीवन छोटा लम्बी राहें

मोम हृदय, जलने  को आतुर,
प्राण तडपती पीड़ा बाँटें
समय किसे अंतस में झांके !!
शहर भागता- दौड़ा जाये ,
क्या पकड़ा, क्या छोड़ा जाये !
पिंजरे की सांकल ना खुलती
द्वार न तम का तोडा जाये !
अंतहीन चिर मेरा चलना,
जीवन छोटा लम्बी राहें !!
आदि अंत का छोर न जानूँ ,
तू मुझमें ,बस इतना मानूँ !
सात युगों से प्रण है मिटकर ,
एक बार प्रिय तुमको पालूँ !
सप्त-तलों की गहराई है ,
अधर सिन्धु-तट पर भी प्यासे !!


मुक्तक

दर्द सहती रही जाने किसके लिए ,
आँख रोती रही जाने किसके लिए !
इस जमाने को मेरी जरूरत नहीं ;
सांस चलती रही जाने किसके लिए !!
               ~भावना~  

02 January, 2010

Happy New Year 2010

निसंदेह,अध्याय दर्द का,बहुत बड़ा है !
पन्ने विरहातप के कितने ज्ञात नहीं !
जिल्द चढ़ाये रक्खी मैने सदा हास की!
आज आवरण हटा बंधुवर अनायास ही !!
तुमने झांक लिया मन,अंतर-तम मेरा ,
एक व्यथामय महाकाव्य है जीवन मेरा !!