कठपुतलियाँ
लगीं नाचने
इशारों पर उँगलियों के ..!!
कभी सांस ज़रा ऊपर
तो कभी ज़रा नीचे !
न हँसी हुई अपनी
न आँसू रहे अपने,
उतना ही बढ़े पग
वो जितनी डोर खींचे !
देखो ना
परदा उठते ही
बदल गया
क़िरदार !
- भावना
परदा उठते ही
बदल गया
क़िरदार !
- भावना